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सर्व कार्य सिद्धि साधना (भैरव बाबा)

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आज हम एक विशेष साधना प्रयोग दे रहे हैं जिसके माध्यम से आप जीवन मे बहोत कुछ प्राप्त कर सकते है । सर्वप्रथम प्रयोग है बावन भैरव का तांत्रोत्क मंत्र जो सर्वोपरि मंत्र है । इस मंत्र साधना के माध्यम से आप अपने जीवन मे लटके हुए कामो को आसानी से पूर्ण कर सकते है,इसका विधान भी बहोत आसान है, कहि से पाँच मुखी रुद्राक्ष माला प्राप्त करे और उसी माला से आपको 11 माला मंत्र जाप रात्रि में 21 दिनों तक करने से मंत्र सिद्धि संभव होगी । 22 वे दिन आपको अग्नि प्रज्वलित करके लौंग की 108 बार आहुतिया देनी है, साधक का मुख साधना काल मे दक्षिण दिशा के तरफ होना जरूरी है। मंत्र- ॐ भ्रं भ्रं भैरवाय भ्रं भ्रं नमः Om bhram bhram bhairavaay bhram bhram namah जब भी आपकी कोई कामना आपको पूर्ण करनी हो तब दाए हाथ मे जल लेकर अपनी कामना बोले और जल को जमीन पर छोड़ दीजिए,उसके बाद उसी रुद्राक्ष माला से 11 माला जाप करे तो आपको कामना अवश्य ही पूर्ण होगी । यह मेरा स्वयं का आजमाया हुआ मंत्र है और इस मंत्र की 1 माला जाप मैं नित्य करता हु । अब बात करेंगे द्वितीय मंत्र की जो पूर्ण रूपेण एक रक्षात्मक मंत्र है,इस मंत्र का 101 माला जाप हन...

वशीकरण साबर मंत्र,षटकर्म भाग-2.

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वशीकरण साबर मंत्र,षटकर्म भाग-2. द्वितीय क्रिया शाबर वशीकरण मंत्र वश्यं जनानां सर्वेषां वात्सल्य हृद्-गतं-स्मृतम् । (सांख्यायन तंत्र) वश्यं जनानां सर्वेषां विधेयत्वमुदीरितम् । (उड्डीश तंत्र) राजअर्थात् जिससे सभी जीवों (स्त्री-पुरुषों) को वश में किया जाता है और सबके हृदय में अपने प्रति वात्सल्य (प्रेम) पैदा किया जाता है उसे वशीकरण कहते हैं। स्त्री-पुरुष वशीकरण, -वशीकरण, आकर्षण, मोहन आदि वश्य-कर्म के भेद हैं। उपरोक्त मंत्र से यह स्पष्ट है कि वशीकरणा साधना प्रेम की साधना है। संसार के सारे प्राणियों को प्रेम से वश में किया जा सकता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति काम इत्यादि भाव से अथवा बुरे विचार रखता है तो उसे लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है। शुद्ध भाव से प्रेम में सफलता राज्यकार्य में सफलता, परिवार में अनुकूलता, मित्रों से सहयोग इत्यादि कार्य हेतु ही यह वशीकरण साधना सम्पन्न करनी चाहिये। साधना विधान:- साधक किसी भी माह के शनिवार को रात्रि में 10 बजे के पश्चात् शुद्ध पवित्र होकर पश्चिम दिशा की ओर मुख कर अपने सामने लकड़ी के एक बाजोट पर लाल वस्त्र बिछा दें। इसके पश्चात साधक अपने सामने...

तांत्रोत्क वनस्पति टोटके.

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तांत्रोत्क वनस्पति टोटके. छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं। बिल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है। अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे। नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा। संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे। आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के ...

गणपति जी का चमत्कारी मंत्र 10 दिनों तक करें इस मंत्र का जप- दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

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गणेश चतुर्थी से 10 दिनों तक करें इस मंत्र का जप- दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति इस मंत्र की साधना से होगा दरिद्रता का नाश गणेश मंत्र साधना भारतीय परंपरा के अनुसार किसी भी कार्य का शुभारंभ करने से पूर्व गणपति का स्मरण व पूजन अवश्य किया जाता है, क्योंकि ऐसा करने से उस कार्य में आने वाली समस्या समाप्त हो जाती है, जिस कारण वह उस कार्य में शीघ्र ही सफलता प्राप्त कर लेता है । गणपति का एक विशिष्ट स्वरूप विघ्नहर्ता के रूप में प्रचलित है जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला और शक्ति के गुणों का साकार स्वरूप है, जो सद्गृहस्थ व योगी दोनों ही जीवन को की समस्याओं का निराकरण करने वाली है ऐसे देव गणेश की उपासना साधना जो देवों के अधिपति है, जिसके इस मंत्र की साधना से व्यक्ति जीवन की दरिद्रता से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पा सकता है ।    गणपति जी की साधना अपने आप में एक श्रेष्ठतम साधना है जो तुरंत फल देने वाली है, इनकी साधना को करने से साधक के जीवन की दरिद्रता हमेशा हमेशा के लिए दूर भाग जाती हैं । गणेश जी की यह साधना आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साधना कहलाती है, जिसे गणेश चतुर्थी से लेकर पूर...

पितृदोष निवारण शाबर मंत्र (pitru dosh nivaran shabar mantra)

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पितृदोष निवारण शाबर मंत्र (pitru dosh nivaran shabar mantra) हम जहां रहते हैं वहां कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं किंतु बहुधा हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं,जिससे हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो उठता है और हम दिशाहीन हो जाते हैं । इन अदृश्य शक्तियों को ही आम जन ऊपरी बाधाओं की संज्ञा देते हैं । भारतीय ज्योतिष में ऐसे कतिपय योगों का उल्लेख है जिनके घटित होने की स्थिति में ये शक्तियां शक्रिय हो उठती हैं और उन योगों के जातकों के जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डाल देती हैं। भारतीय संस्कृति के अनुसार प्रेत योनि के समकक्ष एक और योनि है जो एक प्रकार से प्रेत योनि ही है, लेकिन प्रेत योनि से थोड़ा विशिष्ट होने के कारण उसे प्रेत न कहकर पितृ योनि कहते हैं । प्रेत लोक के प्रथम दो स्तरों की मृतात्माएं पितृ योनि की आत्माएं कहलाती है । इसीलिए प्रेत लोक के प्रथम दो स्तरों को पितृ लोक की संज्ञा दी गयी है। भारतीय ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक व मंगल को रक्त का कारक माना गया है । अतः जब जन्मकुंडली में सूर्य या मंगल, पाप प्रभाव में होते हैं तो पितृदोष का निर्माण होता है । पितृ ...

बिजोत्क उच्छिष्ट गणपति साधना.

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बिजोत्क उच्छिष्ट गणपति साधना. विश्वामित्र ने एक स्थान पर लिखा है कि जीवन का पूर्ण सौभाग्य फल उच्छिष्ट गणपति प्रयोग है। महर्षि वशिष्ठ ने उच्छिष्ट गणपति साधना को जीवन की पूर्ण साधना कहा है। मात्र इस प्रयोग से जीवन में वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है, जो अभीष्ट लक्ष्य होता है। इच्छाएं, भावनाएं और मनोरथ पूरे होते हैं। विश्वमित्र संहिता के अनुसार, साधक को हाथो हाथ प्राप्त होते है। कई बार देखा गया है कि इधर साधना संपन्न होती है और उधर सफलता की भी प्राप्ति संभव होने लगती है। साधना के कुछ लाभ निम्न हैं: - समस्त कर्जों की समाप्ति और दरिद्रता का निवारण - निरंतर आर्थिक-व्यापारिक उन्नति - लक्ष्मी प्राप्ति और उसका पूर्ण उपभोग - भगवान गणपति के प्रत्यक्ष दर्शनों की संभावना - प्रबल इच्छा और उसकी पूर्णता का मार्ग प्रशस्त होता है एल शास्त्रों में कहा गया है कि यह प्रयोग किसी भी बुधवार को संपन्न किया जा सकता है। परंतु गणपति सिद्धि दिवस, यानी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी शीघ्र सफलतादायक हैं। शास्त्रों के अनुसार यह प्रयोग दिन, या रात्रि में, कभी भी संपन्न किया जा सकता है। जीवन में जो इच्छाएं पूर्ण हों, उ...

तंत्र बाधा निवारण मंत्र (काली माता तंत्र निवारण मंत्र )

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तंत्र बाधा निवारण मंत्र (काली माता तंत्र बाधा निवारण मंत्र) आप सभी मित्रो को आदेश।  तंत्र बाधा एक ऐसी परेशानी है जो होने पर समझ नहीं आता क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। तंत्र बाधा अनेक परेशानियों का कारण बन सकता है।  वर्तमान में कई ऐसे मनुष्य है जो तंत्र बाधा से ग्रसित है।तंत्र बाधा के कारण प्रगति रुक जाती है।मनुष्य कितना ही परिश्रम कर ले,परन्तु उसकी मेहनत तंत्र बाधा के कारण सफल नहीं हो पाती है।तथा वो अपने जीवन के दुखो को भाग्य समझ कर बैठ जाता है।परन्तु क्या ये इसका हल है ? नहीं बिलकुल नहीं,हमें तंत्र बाधा को अपने जीवन से उठाकर बाहर फेक देना चाहिए।प्रस्तुत प्रयोग इसी विषय पर है।चाहे तंत्र बाधा पहाड़ जितनी बड़ी ही क्यों न हो,इस प्रयोग के माध्यम से मात्र एक रात्रि में ही वो समाप्त हो जाती है। तथा जीवन से समस्त बाधा का निवारण हो जाता है। कोई भी तंत्र बाधा से मुक्ति निवारण पाने के लिए तंत्र शाबर साधन मंत्र का प्रयोग कर समाधान प्राप्त कर सकता है |आजकल हर कोई अपनी ज़िंदगी मे इतना व्यस्त हो चुका है की उसको दूसरों के बारे मे सोचने का समय ही नहीं मिलता। लोग नौकरी व अपने घ...