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माहालक्ष्मी साधना (mahalakshmi sadhana)

माहालक्ष्मी साधना (mahalakshmi sadhana ) ..........कमला साधना मनुष्य को अपनी अधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये धन की ही आवश्यकता होती है। चाहे बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए, चाहे सामाजिक सुर...

लक्ष्मी कृपा मंत्र

अनादिनिधनं सर्व लोक महेश्वरम् लोकाध्यक्षं स्तुवन्नित्यं सर्वदुःखातिगो भवेत् | हमारी संस्कृति के कई आधार स्तंभ में से एक महत्वपूर्ण पक्ष पौराणिक साहित्य है, पौराणिक ऐतेहासिक द्रष्टान्त तथा कई प्रकार के आगमिक प्रक्रियाओ के  संग्रह सम यह ग्रन्थ अपने आप में कई कई प्रकार के उच्चकोटि की घटनाओ का साक्षी बना देता है किसी भी साधक को. साथ ही साथ विविध व्यक्तित्व तथा उनसे सबंधित जीवन भी अद्भुत विवरण प्रस्तुत करते है. ऐसे ही एक अद्भुत व्यक्तित्व के धनि रहे है शांतनु पुत्र भीष्म. अपने समय में बल और साहस की साक्षात् मूर्ति के साथ साथ अपने जीवन चरित्र के कारण सर्वदा ही यह व्यक्तित्व अपने समय में तथा उसके बाद भी वन्दनीय रहे है. प्रस्तुत पंक्तियाँ उनके द्वारा उच्चारित की गई पंक्तियाँ है. धर्मराज को संबोधित करते हुवे उन्होंने यह भगवान श्री विष्णु के सबंध में बोला है. जो आदि- अनादी है, समय से परे है, जो सर्वत्र है, वह सभी लोक के स्वामी अर्थात आधिपत्य को धारण करने वाले सभी लोक के पालक अध्यक्ष श्री भगवान विष्णु है जो की अपने साधको के सभी दुःख सभी विषाद को पूर्ण रूप से दूर करने में समर्थ है. निश्चय ही...