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बिर कंगण-(21 बिर युक्त)

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बिर कंगण-(21 बिर युक्त) स्वर्ण रूप्यं ताम्रं च रंग यशदमेव च। शीसं लौहं रसश्चेति धातवोऽष्टौ प्रकीर्तिता:। सुश्रुतसंहिता में केवल प्रथम सात धातुओं का ही निर्देश देखकर आपातत: प्रतीत होता है कि सुश्रुत पारा (पारद, रस) को धातु मानने के पक्ष में नहीं हैं, पर यह कल्पना ठीक नहीं। उन्होंने रस को धातु भी अन्यत्र माना है (ततो रस इति प्रोक्त: स च धातुरपि स्मृतथ:)। अष्टधातु का उपयोग प्रतिमा के निर्माण के लिए भी किया जाता है। अष्टधातु - सोना, चाँदी, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा, लोहा, तथा पारा (रस). अष्टधातु का मुनष्य के स्वास्थ्य से गहरा सम्बंध है यह हृदय को भी बल देता है एवं मनुष्य की कितनी ही बीमारियों को दूर करता है। अष्ट धातु की अंगूठी पहिनने पर या कड़ा धारण करने पर यह मानसिक तनाव को दूर कर मन में शान्ति लाता है। यहीं नहीं यह वात पित्त कफ का इस प्रकार सामंजस्य करती हैं कि बीमारियां कम एवं स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव होता है अष्ट धातु मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालता है। इससे व्यक्ति में तीव्र एवं सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाती है। धीरे-धीरे सम्पन्नता में वृद्धि होती है। यह...